मुख्य बातें

  • भारत में “सोलर इन्वर्टर” तीन अलग चीज़ें हैं: बैटरी वाला सोलर UPS (PCU), रूफ़टॉप सिस्टम का ऑन-ग्रिड इन्वर्टर, और दोनों काम करने वाला हाइब्रिड सोलर इन्वर्टर। पीएम सूर्य घर और नेट मीटरिंग सिर्फ़ आख़िरी दो पर मिलते हैं।
  • 3 kW ऑन-ग्रिड सोलर इन्वर्टर लगभग ₹20,000 से ₹32,000 का है। 3 kW हाइब्रिड बैटरी जोड़ने से पहले ही ₹44,000 से ₹1 लाख से ऊपर तक का है।
  • सोलर UPS में PWM चार्जर हो तो वह सिर्फ़ छोटे 12 V वाले पैनल ठीक से चला पाता है। बड़े रूफ़टॉप पैनल के लिए MPPT चाहिए।
  • इन्वर्टर ही वह हिस्सा है जो सबसे ज़्यादा बदलना पड़ता है। कम से कम आठ साल की वारंटी और अपने शहर में सर्विस सेंटर देखें।

सोलर इन्वर्टर सोलर पैनल की DC बिजली को घर में चलने वाली AC बिजली में बदलता है। सुनने में एक ही चीज़ लगती है, पर पास की दुकान, रूफ़टॉप इंस्टॉलर और ऑनलाइन लिस्टिंग, तीनों “घर के लिए सोलर इन्वर्टर” से अलग-अलग चीज़ का मतलब निकाल सकते हैं। ग़लत चुना तो सब्सिडी, नेट मीटरिंग या पैनल का ज़्यादातर उत्पादन हाथ से जा सकता है। यह गाइड इसी चुनाव से शुरू होती है, फिर सोलर इन्वर्टर का दाम, हाइब्रिड बनाम ऑन-ग्रिड, MPPT बनाम PWM, साइज़ और वारंटी समझाती है।

तीन तरह के सोलर इन्वर्टर, आमने-सामने

सोलर UPS / PCUऑन-ग्रिड इन्वर्टरहाइब्रिड सोलर इन्वर्टर
यह क्या हैघर का इन्वर्टर जिसमें सोलर चार्जर लगा होपैनल की बिजली घर और ग्रिड को देता हैऑन-ग्रिड इन्वर्टर और बैटरी चार्जर एक ही डिब्बे में
बैटरीहमेशानहींहाँ
बिजली जाने पर चलता हैहाँनहीं, बंद हो जाता हैहाँ, चुने हुए सर्किट पर
नेट मीटरिंगनहींहाँहाँ
पीएम सूर्य घर सब्सिडीनहींहाँहाँ, पैनल पर
आम साइज़1 से 5 kVA, 12 से 48 V1 से 10 kW3 से 10 kW
किसके लिएकुछ पैनल के साथ लाइट-पंखे का बैकअपजहाँ कट कम हों, वहाँ बिल घटानाबिल घटाना और कट में बिजली रखना

बिजली का बिल घटाना और ₹78,000 की पीएम सूर्य घर सब्सिडी चाहिए, तो रूफ़टॉप सिस्टम के साथ ऑन-ग्रिड या हाइब्रिड सोलर इन्वर्टर लगवाएँ। मुख्य रूप से कट के समय बैकअप चाहिए और छत पर कुछ ही पैनल की जगह है, तो सोलर UPS सस्ता रास्ता है। बैटरी के ख़र्च के साथ तीनों सिस्टम की पूरी तुलना ऑन-ग्रिड, ऑफ़-ग्रिड और हाइब्रिड सोलर में है।

भारत में सोलर इन्वर्टर का दाम, अक्टूबर 2026

सोलर इन्वर्टरसाइज़दाम, अक्टूबर 2026
सोलर UPS / PCU1 kVA, 12 V₹6,000–12,000 और GST
सोलर UPS / PCU3 kVA₹18,000–30,000 और GST
बैटरी और पैनल के साथ सोलर UPS कॉम्बो1.4 kVA, 150 Ah ट्यूबलर, 6 × 170 Wलगभग ₹28,000 (Luminous NXG 1450e)
ऑन-ग्रिड इन्वर्टर3 kW, सिंगल फ़ेज़₹20,000–32,000
ऑन-ग्रिड इन्वर्टर5 kW, सिंगल फ़ेज़₹26,000–45,000
हाइब्रिड सोलर इन्वर्टर3 kW₹44,000–1,02,000
हाइब्रिड सोलर इन्वर्टर5 kW₹64,000–1,36,000
हाइब्रिड सोलर इन्वर्टर10 kW₹1,42,000–2,58,000
जहाँ लिखा न हो, सिर्फ़ इन्वर्टर का दाम। दायरे अक्टूबर 2026 के ब्रांड स्टोर, रिटेलर और प्राइस ट्रैकर से। kW से ज़्यादा दाम ब्रांड और विक्रेता से बदलता है।

दो बातें साफ़ दिखती हैं। एक ही kW के हाइब्रिड का दाम ब्रांड के हिसाब से दोगुने से ज़्यादा बदलता है, इसलिए कम से कम दो कोटेशन लें। और रूफ़टॉप सिस्टम में इन्वर्टर का हिस्सा छोटा है: 3 kW ऑन-ग्रिड इन्वर्टर 3 kW सिस्टम के दाम का लगभग दसवाँ हिस्सा है। जो हिस्सा सबसे ज़्यादा ख़राब होता है, उस पर अनजान ब्रांड लेकर ₹5,000 बचाना शायद ही समझदारी है। मॉडल आमने-सामने सोलर इन्वर्टर तुलना पर देखें।

ऑन-ग्रिड सोलर इन्वर्टर: रूफ़टॉप सोलर का आम विकल्प

ऑन-ग्रिड इन्वर्टर, जिसे ग्रिड-टाई या स्ट्रिंग इन्वर्टर भी कहते हैं, में बैटरी नहीं होती। यह पैनल से घर चलाता है, बची बिजली नेट मीटर से भेजता है, और ग्रिड जाते ही पल भर में बंद हो जाता है, ताकि मरम्मत हो रही लाइनों में बिजली न जाए। ज़्यादातर पीएम सूर्य घर सिस्टम में यही लगता है। प्रति यूनिट बिजली के हिसाब से यह सबसे सस्ता है और जहाँ बिजली कम जाती है, वहाँ यही सही है।

हाइब्रिड सोलर इन्वर्टर: कब इसका ख़र्च बनता है

हाइब्रिड सोलर इन्वर्टर ऑन-ग्रिड का काम भी करता है और बैटरी चार्ज करके कट में ज़रूरी सर्किट भी चलाता है। 5 kWh लिथियम बैटरी के साथ 3 kW हाइब्रिड आमतौर पर पंखे, लाइट, फ़्रिज और Wi-Fi लगभग आठ घंटे चलाता है। हाइब्रिड सिस्टम पर भी पीएम सूर्य घर सब्सिडी मिलती है, जो सिर्फ़ पैनल पर गिनी जाती है।

  • ठीक है: ज़्यादातर दिन एक घंटे या ज़्यादा का कट, या घर से ऐसा काम जो रुक नहीं सकता।
  • आगे के लिए ठीक है: अभी कट कम हैं पर बढ़ रहे हैं। बाद में इन्वर्टर बदलने से अभी हाइब्रिड लेना सस्ता पड़ता है।
  • ज़रूरी नहीं: स्थिर ग्रिड और बैकअप की ज़रूरत नहीं। नेट मीटरिंग पहले से मुफ़्त स्टोरेज जैसा काम करती है।

ख़रीदने से पहले बैटरी वोल्टेज देखें। ज़्यादातर 3 kW हाइब्रिड 24 V या 48 V पर चलते हैं; 48 V में करंट कम रहता है और यह लिथियम के लिए ठीक है। बैकअप लोड के हिसाब से बैटरी का साइज़ बैटरी बैकअप कैलकुलेटर से निकालें और बैटरियाँ सोलर बैटरी तुलना पर देखें।

बैटरी के साथ सोलर इन्वर्टर: सोलर UPS का रास्ता

सोलर UPS, जो PCU या “बैटरी वाले सोलर इन्वर्टर” के नाम से बिकता है, असल में घर का आम इन्वर्टर है जिसके अंदर सोलर चार्ज कंट्रोलर लगा है। दिन में यह पैनल से बैटरी चार्ज करता है और धूप कम हो तो ग्रिड से। यह बिजली बाहर नहीं भेजता, इसलिए न नेट मीटरिंग है, न सब्सिडी। यह उन घरों के लिए ठीक है जिन्हें मुख्य रूप से बैकअप चाहिए, छोटी दुकानों के लिए, और जहाँ लंबे कट हों और छत छोटी हो।

इसका साइज़ VA और बैटरी वोल्टेज में होता है: 1 kVA, 12 V यूनिट लाइट, पंखे और TV चलाती है; 24 V पर 2.5 से 3 kVA में फ़्रिज या छोटी मोटर भी जुड़ जाती है। पहले होम लोड कैलकुलेटर से अपना बैकअप लोड निकालें।

MPPT बनाम PWM: यही तय करता है कि सोलर कितना मिलेगा

हर सोलर UPS में चार्ज कंट्रोलर होता है, जो या तो PWM होता है या MPPT। PWM सस्ता है और पैनल को सीधे बैटरी से जोड़ देता है, जिससे पैनल बैटरी की वोल्टेज तक खिंच जाता है। MPPT पैनल का सबसे अच्छा पॉइंट पकड़ता है और अतिरिक्त वोल्टेज को चार्जिंग करंट में बदलता है। सारे ऑन-ग्रिड और हाइब्रिड इन्वर्टर MPPT वाले होते हैं; सोलर UPS में आपको देखना पड़ता है।

12 V बैटरी पर पैनलPWM सेMPPT से
170 W का “12 V” पैनल (लगभग 18 V)लगभग 127 W, करीब 75%लगभग 160 W
540 W का रूफ़टॉप पैनल (लगभग 41 V)लगभग 178 W, करीब एक-तिहाई, अगर कंट्रोलर उसे ले भी लेलगभग 510 W
PWM पैनल को बैटरी की चार्जिंग वोल्टेज (लगभग 13.5 V) तक खींच लेता है। MPPT अतिरिक्त वोल्टेज को चार्जिंग करंट में बदल देता है, लगभग 95% एफ़िशिएंसी से।

इसीलिए PWM सोलर इन्वर्टर के कॉम्बो छोटे 165 से 170 W पैनल के साथ आते हैं। आज के 540 से 600 W रूफ़टॉप पैनल लगाने हों, या आगे पैनल बढ़ा सकते हों, तो MPPT सोलर इन्वर्टर लें। 12 या 24 V सिस्टम के लिए अलग MPPT चार्ज कंट्रोलर 20 से 60 A में लगभग ₹1,800 से ₹6,000 का आता है।

क्या घर के मौजूदा इन्वर्टर में सोलर जोड़ सकते हैं?

हाँ, दो तरीक़ों से। थोड़ी मदद के लिए कुछ पैनल और मौजूदा बैटरी के बीच MPPT चार्ज कंट्रोलर लगाएँ, ताकि कुछ चार्जिंग धूप से हो, हालाँकि ज़्यादातर घरेलू इन्वर्टर 12 V के होते हैं और कुछ सौ वॉट पैनल तक ही सीमित रहते हैं। बिल सच में घटाना हो, तो अलग से रूफ़टॉप ऑन-ग्रिड सिस्टम लगवाएँ और पुराना इन्वर्टर बैकअप के लिए रखें। कई घर ठीक यही जोड़ी चलाते हैं: दिन में सोलर बिल घटाता है, और कट में पुराना इन्वर्टर और बैटरी काम आते हैं।

सोलर इन्वर्टर का साइज़ कैसे चुनें

  • इन्वर्टर का kW पैनल से मिलाएँ। 3.2 से 3.6 kW पैनल के साथ 3 kW सोलर इन्वर्टर सामान्य है। भारत की गर्मी में पैनल ज़्यादातर समय अपनी रेटिंग से नीचे रहते हैं, इसलिए थोड़ा बड़ा पैनल लगभग कुछ नहीं खोता।
  • सिंगल या थ्री फ़ेज़। 5 kW तक के ज़्यादातर घर सिंगल फ़ेज़ पर चलते हैं। बड़े सिस्टम या पहले से थ्री-फ़ेज़ सप्लाई वाले घरों को थ्री-फ़ेज़ सोलर इन्वर्टर चाहिए।
  • MPPT इनपुट। दो अलग MPPT इनपुट तब काम आते हैं जब पैनल दो दिशाओं में हों, छत के कुछ हिस्से पर छाया हो, या बाद में अलग प्रकार के पैनल जोड़ने हों।
  • आगे की जगह। EV या और AC आने वाले हों, तो अभी उसी लोड के हिसाब से साइज़ लें।

सिस्टम का साइज़ अभी तय नहीं? सोलर कैलकुलेटर से शुरू करें।

वारंटी, बदलना और सर्विस

पैनल 25 से 30 साल चलते हैं; इन्वर्टर आमतौर पर 10 से 15 साल। पीएम सूर्य घर सिस्टम के लिए MNRE कमीशनिंग से कम से कम आठ साल की प्रोडक्ट वारंटी और BEE लेबल वाले इन्वर्टर माँगता है। ब्रांड की वारंटी 5 से 10 साल की होती है, और कुछ में फ़ीस देकर बढ़ सकती है। पैनल की उम्र में एक बार इन्वर्टर बदलने का ख़र्च मानकर चलें, आज के दाम पर 3 kW ऑन-ग्रिड के लिए लगभग ₹20,000 से ₹35,000।

ब्रांड के नाम से ज़्यादा सर्विस मायने रखती है। इंस्टॉलर से पूछें कि किन ब्रांड की मरम्मत आपके शहर में एक हफ़्ते में हो सकती है, और पहले ही दिन इन्वर्टर की Wi-Fi या ऐप मॉनिटरिंग चालू करवाएँ, ताकि उत्पादन घटे तो पता चले।

ख़रीदने से पहले ये सवाल पूछें

  • यह ऑन-ग्रिड है, हाइब्रिड है या सोलर UPS, लिखित में?
  • चार्ज कंट्रोलर MPPT है? कितने MPPT इनपुट हैं?
  • मॉडल BEE लेबल वाला है और पीएम सूर्य घर में मान्य है?
  • वारंटी कितनी है, और उसे कौन निभाएगा: ब्रांड या इंस्टॉलर?
  • सबसे पास का सर्विस सेंटर कहाँ है?
  • ऐप मॉनिटरिंग शामिल है और इंस्टॉलेशन पर चालू होगी?

आपको कौन-सा सोलर इन्वर्टर लेना चाहिए

  • स्थिर ग्रिड, बिल घटाना है: रूफ़टॉप सिस्टम के साथ ऑन-ग्रिड सोलर इन्वर्टर।
  • रोज़ कट, बिल भी घटाना है: ज़रूरी लोड के हिसाब से लिथियम बैटरी के साथ हाइब्रिड सोलर इन्वर्टर।
  • सिर्फ़ बैकअप, छत छोटी: कुछ पैनल के साथ MPPT सोलर UPS।
  • पहले से घरेलू इन्वर्टर है: ऑन-ग्रिड रूफ़टॉप सिस्टम जोड़ें और पुराना इन्वर्टर कट के लिए रखें।
आपके घर को कितना बड़ा सिस्टम चाहिए?अपना बिल और राज्य, लगभग एक मिनट।
सोलर कैलकुलेटर खोलें

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सोलर इन्वर्टर क्या है?

सोलर इन्वर्टर सोलर पैनल की DC बिजली को घर की AC बिजली में बदलता है। ऑन-ग्रिड मॉडल बची बिजली ग्रिड को भेजते हैं, हाइब्रिड मॉडल बैटरी भी चार्ज करते हैं, और सोलर UPS बैटरी चार्ज करके उसी से घर चलाते हैं।

घर के लिए सोलर इन्वर्टर का दाम कितना है?

अक्टूबर 2026 में 3 kW ऑन-ग्रिड सोलर इन्वर्टर लगभग ₹20,000 से ₹32,000, 3 kW हाइब्रिड सोलर इन्वर्टर लगभग ₹44,000 से ₹1,02,000, और 1 kVA सोलर UPS लगभग ₹6,000 से ₹12,000 और GST का है। बैटरी और पैनल अलग से।

हाइब्रिड इन्वर्टर बेहतर है या ऑन-ग्रिड?

जहाँ कट कम हों वहाँ ऑन-ग्रिड बेहतर सौदा है, क्योंकि यह लगभग आधे दाम का है और नेट मीटरिंग व सब्सिडी भी मिलती है। ज़्यादातर दिन एक घंटे या ज़्यादा बिजली जाती हो, तो हाइब्रिड इन्वर्टर बेहतर है, क्योंकि यह बैटरी से ज़रूरी लोड चलाता है।

क्या बिना बैटरी के सोलर इन्वर्टर चल सकता है?

हाँ। ऑन-ग्रिड सोलर इन्वर्टर में बैटरी होती ही नहीं। यह सिर्फ़ ग्रिड रहने पर चलता है और बिजली जाने पर बंद हो जाता है।

क्या MPPT, PWM से बेहतर है?

हाँ। MPPT चार्ज कंट्रोलर पैनल की लगभग 95% बिजली बैटरी तक पहुँचाता है और बड़े रूफ़टॉप पैनल के साथ चलता है। PWM छोटे 12 V पैनल पर भी करीब एक-चौथाई खो देता है और आज के 540 W पैनल का ज़्यादातर उत्पादन बेकार कर देता है।

3 kW सिस्टम के लिए कितने साइज़ का सोलर इन्वर्टर चाहिए?

लगभग 3.2 से 3.6 kW पैनल के साथ 3 kW सोलर इन्वर्टर। सिंगल फ़ेज़ लें, जब तक घर में पहले से थ्री-फ़ेज़ सप्लाई न हो या सिस्टम लगभग 5 kW से बड़ा न हो।