मुख्य बातें

  • केंद्र की सब्सिडी पहले 2 kW पर ₹30,000 प्रति kW और तीसरे kW पर ₹18,000 है, यानी ज़्यादा से ज़्यादा ₹78,000। पहाड़ी, पूर्वोत्तर और द्वीप वाले राज्यों में ₹85,800।
  • कुछ राज्य अपनी तरफ़ से भी पैसा देते हैं। आज दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, राजस्थान और हरियाणा ऐसा कर रहे हैं।
  • सिस्टम लगाने से पहले पोर्टल पर आवेदन करें। 1 जून 2026 से सब्सिडी वाले सिस्टम में भारतीय सेल वाले पैनल ज़रूरी हैं।
  • 3 kW का सिस्टम सब्सिडी के बाद लगभग ₹1.52 से ₹1.62 लाख का पड़ता है और करीब पाँच साल में पैसा वापस आ जाता है।

पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना केंद्र सरकार की वह योजना है जिसमें घर की छत पर सोलर पैनल लगाने पर तय सब्सिडी मिलती है। आप pmsuryaghar.gov.in पर आवेदन करते हैं, रजिस्टर्ड वेंडर सिस्टम लगाता है और DISCOM के चालू करते ही पैसा सीधे आपके बैंक खाते में आ जाता है। योजना मार्च 2027 तक चलेगी।

इस गाइड में है कि कितनी सब्सिडी मिलती है, आपका राज्य क्या जोड़ता है, सब्सिडी के बाद सिस्टम कितने का पड़ता है, लोन कैसे मिलता है और आवेदन कैसे करें ताकि क्लेम रिजेक्ट न हो।

पीएम सूर्य घर में कितनी सब्सिडी मिलती है?

सब्सिडी हर kW के हिसाब से मिलती है और 3 kW पर रुक जाती है। ज़्यादातर राज्यों में पहले 2 kW पर ₹30,000 प्रति kW और तीसरे पर ₹18,000 मिलते हैं। विशेष श्रेणी वाले राज्यों को 10% ज़्यादा मिलता है।

सिस्टम साइज़ज़्यादातर राज्यविशेष श्रेणी वाले राज्य
1 kW₹30,000₹33,000
2 kW₹60,000₹66,000
3 kW या ज़्यादा₹78,000₹85,800
₹78,000ज़्यादातर राज्यों में घर के लिए केंद्र की अधिकतम सब्सिडी (विशेष श्रेणी वाले राज्यों में ₹85,800)MNRE दिशानिर्देश, जुलाई 2025

विशेष श्रेणी में सिक्किम समेत पूर्वोत्तर के राज्य, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, अंडमान और निकोबार और लक्षद्वीप आते हैं।

अपनी सब्सिडी ख़ुद निकालें

सिस्टम का साइज़ और अपना राज्य चुनें। कैलकुलेटर ऊपर वाली टेबल के ही स्लैब इस्तेमाल करता है और जहाँ लागू हो, विशेष श्रेणी की रक़म दिखाता है।

1. कौन अप्लाई कर रहा है
पहाड़ी राज्य, पूर्वोत्तर और द्वीपों में ज़्यादा दर मिलती है।
2. सिस्टम साइज़
kW
सोसाइटी के लिए कॉमन एरिया वाले सिस्टम का साइज़।
और जानकारी (optional)
₹
सब्सिडी से पहले का कुल, ताकि आख़िरी ख़र्च दिखे।

आपकी सब्सिडी

हाउसिंग सोसाइटी

हाउसिंग सोसाइटी या RWA को लिफ़्ट, पंप, गलियारे की लाइट और साझा EV चार्जर जैसी कॉमन सुविधाओं के सोलर पर ₹18,000 प्रति kW (विशेष श्रेणी वाले राज्यों में ₹19,800) मिलते हैं। सीमा सोसाइटी के हर घर पर 3 kW और कुल 500 kW है। जो फ़्लैट अपने बिल के लिए सोलर चाहते हैं, वे अपने कनेक्शन पर अलग से आवेदन करते हैं।

आपके राज्य से अतिरिक्त सब्सिडी

कुछ राज्य केंद्र की सब्सिडी के ऊपर अपनी तरफ़ से पैसा देते हैं। ये योजनाएँ राज्य के बजट के साथ खुलती और बंद होती हैं, इसलिए इस टेबल को शुरुआत मानें और साइन करने से पहले अपने DISCOM या राज्य की एजेंसी से पक्का कर लें।

राज्यराज्य से अतिरिक्त पैसाकिसे मिलता है
दिल्ली₹26,000 प्रति kW, ज़्यादा से ज़्यादा ₹78,0003 kW तक के घर, महीने में 400 यूनिट या कम
उत्तर प्रदेश₹15,000 प्रति kW, ज़्यादा से ज़्यादा ₹30,000UPNEDA के ज़रिए आवेदन करने वाले घर
बिहार₹10,000 प्रति kW, ज़्यादा से ज़्यादा ₹20,000मुख्यमंत्री सोलर प्रोत्साहन योजना
तमिलनाडु₹5,000 से ₹22,000पहले 1 लाख घर, मार्च 2027 तक
राजस्थान₹17,000मुफ़्त बिजली योजना वाले घर, लगभग 1.1 kW
हरियाणा₹50,000 तकसालाना आय ₹1.8 लाख तक, 2 kW तक
महाराष्ट्र1 kW सिस्टम का ज़्यादातर हिस्सासिर्फ़ 100 यूनिट/महीने से कम वाले घर (SMART)
असम₹15,000 प्रति kW, ज़्यादा से ज़्यादा ₹45,000घोषित, पर जनवरी 2025 से भुगतान नहीं
गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, केरलफ़िलहाल कुछ नहींसिर्फ़ केंद्र की सब्सिडी
29 सितंबर 2026 तक की रिपोर्ट के हिसाब से। ओडिशा और गोवा ने भी अतिरिक्त सब्सिडी की घोषणा की है, पर रक़म पर जानकारी मेल नहीं खाती, इसलिए अपने DISCOM से पूछें।

कुछ बातें जो टेबल में नहीं आतीं। सितंबर 2026 में मंज़ूर दिल्ली की सब्सिडी से कुल सब्सिडी ₹1.56 लाख तक पहुँचती है, और टेंडर की क़ीमत तक का बाक़ी फ़र्क़ भी राज्य देता है। तमिलनाडु 1 kW पर ₹5,000, 2 kW पर ₹10,000 और 3 kW या ज़्यादा पर ₹22,000 देता है। हरियाणा ₹1.8 से ₹3 लाख सालाना आय वाले परिवारों को कुछ कम रक़म देता है। महाराष्ट्र की SMART योजना में 1 kW सिस्टम के लिए BPL घर ₹2,500, SC और ST घर ₹5,000 और बाक़ी कम खपत वाले घर ₹10,000 देते हैं।

नेट मीटरिंग के नियम और एक्सपोर्ट की गई यूनिट का रेट जानने के लिए कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के पेज देखें।

सब्सिडी के बाद घर का सिस्टम कितने का पड़ता है

2026 में छपी प्राइस गाइड के हिसाब से DCR पैनल वाले घरेलू सिस्टम की क़ीमत इस दायरे में है। आख़िरी क़ीमत छत, स्ट्रक्चर की ऊँचाई, पैनल और इन्वर्टर के ब्रांड और इंस्टॉलर की दूरी पर निर्भर करती है।

साइज़सब्सिडी से पहले क़ीमतसब्सिडीआपका ख़र्चमहीने की सोलर यूनिट
1 kW₹1.20–1.30 लाख₹30,000₹90,000–1 लाखलगभग 120
2 kW₹1.80–1.90 लाख₹60,000₹1.20–1.30 लाखलगभग 240
3 kW₹2.30–2.40 लाख₹78,000₹1.52–1.62 लाखलगभग 360
5 kW₹3.25–3.75 लाख₹78,000₹2.47–2.97 लाखलगभग 600
2026 की प्राइस गाइड से DCR पैनल के साथ लगे सिस्टम की क़ीमतें। सोलर यूनिट भारत के औसत, यानी हर kW पर महीने में 120 यूनिट, पर आधारित हैं।

3 kW के बाद सब्सिडी ₹78,000 पर ही रहती है, इसलिए हर अतिरिक्त kW की पूरी क़ीमत आप देते हैं। हर साइज़ की क़ीमत, सब्सिडी घटाकर, साइज़ के हिसाब से सोलर सिस्टम की क़ीमत पर देखें।

योजना के तहत सोलर लोन

3 kW तक के पीएम सूर्य घर सिस्टम के लिए बैंक बिना गारंटी के लोन देते हैं, RBI के रेपो रेट से 0.5% ऊपर। अगस्त 2026 से रेपो रेट 5.25% है, तो ब्याज 5.75% बनता है।

  • ₹2 लाख तक: SBI 5.75% लेता है और न आय का सबूत माँगता है, न न्यूनतम क्रेडिट स्कोर।
  • ₹2 लाख से ₹6 लाख: SBI 7.90% लेता है, CIBIL स्कोर 650 या ज़्यादा और सालाना आय कम से कम ₹3 लाख चाहिए। 10 kW तक के सिस्टम पर मिलता है।
  • शर्तें: 6 महीने की मोहलत मिलाकर 10 साल तक, कम से कम 10% रक़म आपकी, कोई प्रोसेसिंग फ़ीस नहीं और जल्दी चुकाने पर कोई जुर्माना नहीं।

₹2 लाख का लोन 5.75% पर 10 साल के लिए लें तो किस्त लगभग ₹2,195 महीना बनती है। सब्सिडी सिस्टम चालू होने के बाद आती है, इसलिए कई परिवार उससे लोन का हिस्सा पहले ही चुका देते हैं। दूसरी रक़म के लिए सोलर EMI कैलकुलेटर देखें।

कौन आवेदन कर सकता है

आप पात्र हैं अगर

  • बिजली कनेक्शन घरेलू है और आपके नाम पर है।
  • छत पर छाया रहित जगह है, हर kW के लिए लगभग 100 वर्ग फ़ुट।
  • इस कनेक्शन पर पहले केंद्र की रूफटॉप सोलर सब्सिडी नहीं ली गई है।

आप पात्र नहीं हैं अगर

कनेक्शन कमर्शियल या इंडस्ट्रियल है। दुकान, दफ़्तर, फ़ैक्ट्री, होटल और संस्थान इसमें नहीं आते। सिस्टम ख़रीदने वाला बिज़नेस इसकी जगह एक्सेलरेटेड डेप्रिसिएशन ले सकता है, देखें बिज़नेस के लिए सोलर।

किराएदार

किराएदारों के लिए अलग नियम नहीं है। असल में कनेक्शन आपके नाम पर होना चाहिए और छत के लिए मकान मालिक की लिखित मंज़ूरी चाहिए, और हर DISCOM अलग काग़ज़ माँगता है। वेंडर को कोई पैसा देने से पहले अपने DISCOM से पूछ लें।

आवेदन कैसे करें, एक-एक कदम

  1. pmsuryaghar.gov.in पर अपना राज्य, DISCOM, कंज़्यूमर नंबर और मोबाइल नंबर डालकर रजिस्टर करें।
  2. मोबाइल नंबर और OTP से लॉग इन करें और कंज़्यूमर नंबर डालकर रूफटॉप सोलर का आवेदन भरें।
  3. DISCOM की फ़ीज़िबिलिटी मंज़ूरी का इंतज़ार करें। 10 kW तक के सिस्टम को अब अपने-आप मंज़ूरी (डीम्ड अप्रूवल) मिलती है, इसलिए यहाँ ज़्यादा देर नहीं होनी चाहिए।
  4. फ़ीज़िबिलिटी मंज़ूर होते ही अपने राज्य का रजिस्टर्ड वेंडर चुनें और बैंक की जानकारी दें। क़ीमत लिखित में तय करें, जिसमें पैनल मॉडल, सेल टाइप और इन्वर्टर का नाम हो।
  5. सिस्टम लगवाएँ और इंस्टॉलेशन की जानकारी पोर्टल पर डालें। साथ ही नेट मीटर के लिए आवेदन करें।
  6. DISCOM सिस्टम की जाँच करता है, नेट मीटर लगाता है और कमीशनिंग सर्टिफ़िकेट देता है।
  7. DISCOM की जाँच रिपोर्ट मिलते ही पोर्टल पर सब्सिडी रिडीम करें। पैसा आपके दिए बैंक खाते में आता है।

हर चरण पूरा होते ही आपके पोर्टल डैशबोर्ड पर दिखता है। हर स्क्रीन, स्टेटस के चरण और अटके आवेदन का हल पीएम सूर्य घर में आवेदन और स्टेटस कैसे देखें में है।

ये काग़ज़ तैयार रखें

  • इस कनेक्शन का हाल का बिजली बिल
  • बिजली कनेक्शन वाले नाम से ही बैंक खाता
  • वेंडर का बिल, जिसमें पैनल मॉडल और सीरियल नंबर हों
  • पैनल का DCR सर्टिफ़िकेट

कितना बड़ा सिस्टम लें?

भारत में औसतन हर kW महीने में लगभग 120 यूनिट बनाता है, राजस्थान और गुजरात में ज़्यादा और पूर्वोत्तर में कम। अपने आम महीने के बिल की यूनिट को 120 से भाग दें, इससे शुरुआती साइज़ मिल जाएगा। फिर देख लें कि छत पर इतनी जगह है या नहीं।

महीने की यूनिटसुझाया गया साइज़सब्सिडी (ज़्यादातर राज्य)
150 तक1 से 1.5 kW₹30,000 से ₹45,000
150 से 3002 से 2.5 kW₹60,000 से ₹69,000
300 या ज़्यादा3 kW₹78,000

पूरी सब्सिडी पाने वाला सबसे छोटा साइज़ 3 kW है। इससे बड़ा सिस्टम तभी फ़ायदे का है जब अतिरिक्त यूनिट आप ख़ुद इस्तेमाल करें, क्योंकि ज़्यादातर DISCOM ग्रिड को भेजी यूनिट के ₹2 से ₹4 ही देते हैं, जो ख़रीदी गई यूनिट से बहुत कम है।

पैसा कब वापस आएगा: एक उदाहरण

लखनऊ का एक परिवार महीने में 300 यूनिट ख़र्च करता है और लगभग ₹2,500 देता है, यानी करीब ₹8.30 प्रति यूनिट। 3 kW सिस्टम महीने में लगभग 360 यूनिट बनाता है, जो उनकी खपत पूरी कर देता है। उन्हें साल में लगभग ₹30,000 की बचत होती है।

सिस्टम ₹2.35 लाख का है। केंद्र के ₹78,000 और उत्तर प्रदेश के ₹30,000 के बाद उनका ख़र्च लगभग ₹1.27 लाख रह जाता है, यानी चार साल से थोड़ा ज़्यादा में पैसा वापस। राज्य की सब्सिडी के बिना लगभग पाँच साल लगते। पैनल पर 25 साल की परफ़ॉर्मेंस वारंटी होती है, तो उसके बाद ख़र्च सिर्फ़ सफ़ाई का और कभी न कभी नए इन्वर्टर का।

अपना साइज़ और पैसा वापसी देखेंअपना बिल और राज्य डालें, लगभग एक मिनट।
सोलर कैलकुलेटर खोलें

क्या बिजली सच में मुफ़्त मिलती है?

नाम में मुफ़्त बिजली है, पर बिल में कुछ माफ़ नहीं होता। योजना ऐसे बनी है कि 3 kW सिस्टम वाला आम घर महीने में 300 से ज़्यादा यूनिट बनाए, जो ज़्यादातर घरों की खपत के बराबर है। “मुफ़्त” यूनिट वही हैं जो आपके पैनल बनाते हैं। बिल में फ़िक्स्ड चार्ज फिर भी लगते हैं, और रात में ग्रिड से ली गई यूनिट आपके राज्य के नियम से एक्सपोर्ट की गई यूनिट में घटाई जाती हैं।

ऐसी ग़लतियाँ जिनसे क्लेम रिजेक्ट होता है

  • पोर्टल पर आवेदन से पहले सिस्टम लगवा लेना। बिना आवेदन लगे सिस्टम पर सब्सिडी नहीं मिलती।
  • भारतीय सेल के बिना पैनल। 1 जून 2026 से सब्सिडी वाले सिस्टम में ऐसे पैनल ज़रूरी हैं जिनके सेल सरकार की ALMM लिस्ट-II में हों।
  • ऐसा वेंडर जो आपके राज्य में योजना के लिए रजिस्टर्ड नहीं है, या शिकायतों के बाद पोर्टल ने जिसे बंद कर दिया है।
  • बैंक खाता बिजली कनेक्शन से अलग नाम पर होना।

सिस्टम लगने के बाद

नेट मीटरिंग

DISCOM एक नेट मीटर लगाता है जो ग्रिड को भेजी यूनिट गिनता है। इन यूनिट का हिसाब आपके राज्य पर निर्भर है: कहीं ये आपकी ली गई यूनिट में घट जाती हैं, कहीं हर एक्सपोर्ट यूनिट का तय रेट मिलता है। अपनी खपत से बड़ा सिस्टम लेने से पहले यह ज़रूर पूछ लें।

पैसा कब आता है

सरकार के मुताबिक़ सब्सिडी सिस्टम चालू होने के 30 दिन के अंदर मिलती है, और 2026 में सही आवेदनों का पैसा लगभग तीन से चार हफ़्ते में आ रहा है। नाम में फ़र्क़ और अधूरे काग़ज़ ही देरी की वजह बनते हैं।

रखरखाव

योजना के वेंडर को पाँच साल तक सिस्टम का रखरखाव करना होता है। सूखे महीनों में हर कुछ हफ़्ते में पैनल को सादे पानी से धोएँ और बीच-बीच में इन्वर्टर की स्क्रीन देखें। रोज़ की यूनिट अचानक गिरें तो समझिए कुछ गड़बड़ है।

योजना अब तक कहाँ पहुँची

4 अगस्त 2026 तक योजना के तहत 50.06 लाख घरों पर कुल 14.8 GW के सिस्टम लग चुके थे और ₹28,024 करोड़ सब्सिडी के रूप में दिए जा चुके थे। लक्ष्य मार्च 2027 तक 1 करोड़ घरों का है। सितंबर 2026 की ख़बरों के मुताबिक़ सरकार थोड़ा समय बढ़ाने और बैटरी वाले दूसरे चरण पर विचार कर रही है, पर अभी कोई घोषणा नहीं हुई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पीएम सूर्य घर में अधिकतम सब्सिडी कितनी है?

ज़्यादातर राज्यों में 3 kW या उससे बड़े सिस्टम पर ₹78,000 और विशेष श्रेणी वाले राज्यों में ₹85,800। 1 kW पर ₹30,000 और 2 kW पर ₹60,000।

क्या मेरा राज्य केंद्र की सब्सिडी में कुछ जोड़ता है?

सितंबर 2026 तक दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, राजस्थान और हरियाणा अपनी तरफ़ से पैसा देते हैं। महाराष्ट्र सिर्फ़ महीने में 100 यूनिट से कम खपत वाले घरों की मदद करता है। गुजरात और कर्नाटक अभी कुछ अतिरिक्त नहीं देते।

क्या पहले सिस्टम लगवाकर बाद में आवेदन कर सकते हैं?

नहीं। सिस्टम लगाने से पहले पोर्टल पर आवेदन करें। बिना आवेदन लगे सिस्टम पर सब्सिडी नहीं मिलती।

पीएम सूर्य घर लोन पर ब्याज कितना है?

SBI में ₹2 लाख तक के लोन पर 5.75%, जो रेपो रेट से 0.5% ज़्यादा है। ₹2 लाख से ₹6 लाख के लोन पर 7.90%।

क्या दुकान या दफ़्तर को सब्सिडी मिलती है?

नहीं। सब्सिडी सिर्फ़ घरेलू कनेक्शन के लिए है। सिस्टम ख़रीदने वाला बिज़नेस इसकी जगह एक्सेलरेटेड डेप्रिसिएशन ले सकता है।

सब्सिडी आने में कितना समय लगता है?

सरकार के मुताबिक़ सिस्टम चालू होने के 30 दिन के अंदर। 2026 में सही आवेदनों का पैसा लगभग तीन से चार हफ़्ते में आ रहा है।

पीएम सूर्य घर योजना कब तक है?

योजना मार्च 2027 तक है। समय बढ़ाने पर विचार की ख़बरें हैं, पर घोषणा नहीं हुई है।

स्रोत

आँकड़े आख़िरी बार चेक किए गए: 29 सितंबर 2026.

  1. MNRE revised PM Surya Ghar guidelines, July 2025
  2. SBI: PM Surya Ghar loan terms